Mujhe sapne dikhaao mat...

मुझे सपने दिखाओ मत, कि सपने टूट जाते हैं,
न अपनापन दिखाओ तुम, कि अपने छुट जाते हैं।

न खो जाना सुरीली तान में, फूल कहते हैं,
भ्रमर हमको रसीले गीत गाकर, लूट जाते हैं।

कहानी सिन्धु-मंथन की, यही फ़िर-फ़िर बताती है,
सुधा लेकर, हलाहल के पिलाए, घूँट जाते हैं।

कल रात रो-रोकर बताया एक बच्चे ने,
घरौंदे मत बना लेना घरौंदे टूट जाते हैं।

किनारे कह रहे थे हमसे, लौट कर आती नहीं लहरें,
वचन सौं-सौं मिले हों पर निकल सब झूठ जाते हैं।

मुझे सपने दिखाओ मत, कि सपने टूट जाते हैं।

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