Kabhi kabhi chahata hai dil...
Found this lovely poem in a greeting card...
कभी कभी चाहता है दिल...
सारी दुनिया से बेख़बर,
तुम्हारी बाहों के घेरे में खोए रहना...
तुम्हारी हथेलियों की नर्मी महसूस करना
चाहती हैं मेरी हथेलियाँ...
तुम्हारी साँसों की गर्मी में पिघल जाना
चाहती हैं मेरी साँसे...
और ख़ुद को तुम्हारे इतना करीब
महसूस करना चाहता है दिल,
कि मेरी धड़कनें सुन सकें,
तुम्हारी धड़कनों की आवाज़...
...कभी कभी, रफ्तार भरी इस
ज़िंदगी की भाग-दौड़ से दूर, बहुत दूर,
चाहत की उस हसीन दुनिया में
फुर्सत के कुछ पल,
बिताना चाहता है दिल,
जहाँ हों सिर्फ़ मैं और तुम
और हो मीलों तक फैली तन्हायी।
कभी कभी चाहता है दिल...
सारी दुनिया से बेख़बर,
तुम्हारी बाहों के घेरे में खोए रहना...
तुम्हारी हथेलियों की नर्मी महसूस करना
चाहती हैं मेरी हथेलियाँ...
तुम्हारी साँसों की गर्मी में पिघल जाना
चाहती हैं मेरी साँसे...
और ख़ुद को तुम्हारे इतना करीब
महसूस करना चाहता है दिल,
कि मेरी धड़कनें सुन सकें,
तुम्हारी धड़कनों की आवाज़...
...कभी कभी, रफ्तार भरी इस
ज़िंदगी की भाग-दौड़ से दूर, बहुत दूर,
चाहत की उस हसीन दुनिया में
फुर्सत के कुछ पल,
बिताना चाहता है दिल,
जहाँ हों सिर्फ़ मैं और तुम
और हो मीलों तक फैली तन्हायी।
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