Yaad aate rahna...

A poem by Ashish Agarwal...I find this poem very close to my heart and really love the way this poem flows.

याद आते रहना...

मुझे भूल जाना, पर याद आते रहना
कि, नहीं अब बसर, इन यादों बिन।
यहीं तो हैं वो, कि जिनके सहारे,
कट रही हैं रातें, बीत रहे हैं दिन।

जहाँ में जहाँ और भी हैं तुम्हारे,
हमारी मग़र क्या है दुनिया; क्या जानो?
यहाँ तुम, वहाँ, हर जगह मात्र तुम हो,
पर तुम्हें क्या?
न तब माने थे, न अब मानो।

पर रहने दो मेरे पास, मेरा यह आख़री उपाय।
कि इतना सा ही आशय , और बस इतना अभिप्राय।
न तुम आए थे, न आओगे; न आना।
पर कह दो इन यादों से; न जाएँ।

न जाएं, क्युंकी मैं मरना नहीं चाहता,
और नहीं चाहता मैं जीना भी; है तुमको पता क्या?
इतनी सजा काफ़ी है जो तुमने मुझे दी,
बताये बिना ही, कि है आख़िर खाता क्या।

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